Dil Sukoon
तो अब ये तय हुआकि हम सोचें तुझे रात-दिनसुनती हमें ये फ़िज़ातुझ तक ना पहुँचे सदा जाने-दिलजो भी हुआ सो हुआवहशत बढ़े मन की अब तेरे बिन
रातें सायासूनी कायातुमसे नाताजब से था पाया क्यूँ
दिल सुकून जाने नातू भी क्यूँ माने नादिल सुकून जाने नाजाने ना जाने ना जाने ना
धूप के कहे बिनादिन भला यहाँ कब हुआ?आप ही समेट लोमैं सदा का बिखरा हुआ
आप के बिनाबाग़-ए-दिल में कब क्या हुआ?मिल गए भी तोदाग़-ए-दिल कम ना हुआ
रातें सायासूनी कायातुमसे नाताजब से था पाया क्यूँ
दिल सुकून जाने नातू भी क्यूँ माने नादिल सुकून जाने नाजाने ना जाने ना
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